वैश्विक किसान भाइयों के नाम पत्र -

होम्यो कृषि एक ऐसी विद्या है जिससे जैविक खेती के आयामों को आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि हम जैविक खेती की बात करते है तो हमें यह भी ध्यान देना होगा की हमारा पूरा जैविक चक्र पूरा हो रहा है या नहीं, उसमे प्रयुक्त होने वाले जैव पदार्थ वह भी जैविक मानव के अनुरूप है या नहीं, उत्पादन को स्थिर रखना है, और बढ़ावा देना है उसकी उपलब्धता की भी बात सोचनी होगी। जबकि होम्यो कृषि से संपूर्ण जैविक चक्र पूरा हो रहा है तथा जैविक मानक के अनुरूप है। होम्यो कृषि को अपनाकर आज की स्थिति में हम जहा है वही से रासायनिक खादों और दवाओं के बगैर उत्तम खेती कर पैदावार पा सकते है व आत्मनिर्भर होकर आर्थिक रूप से अपनी बचत कर सकते है। क्योंकि आज यह मिशन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, गाजीपुर, देवरिया, गोरखपुर, प्रतापगढ़, कुशीनगर, मऊ, इलाहाबाद, जौनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिहार, उत्तरांचल, गुजरात, राजस्थान और पंजाब में कार्यरत है। वहाँ के किसान इससे सफल खेती कर रहे है। होम्यो कृषि को इतने प्रदेशो और जनपदों के किसानो ने सहजता के साथ अपनाकर सफलता की मुहर लगा दी है और दिनों दिन उनकी संख्या बढ़ रही है। क्योंकि आज की तिथि में कोई ऐसी विधा नहीं है जिससे हम बिना रासायनिक खादों और दवाओ के प्रयोग से बराबर का उत्पादन ले सकें। पशुधन की समस्या इस तरह है की हमारे पास पर्याप्त मात्र में जैव पदार्थ है ही नहीं। होम्यो कृषि को अपनाकर आप वर्तमान में बराबर का उत्पादन ले सकते है साथ ही जैव पदार्थ का सहारा लेकर के अपना उत्पादन और भी बढ़ा सकते हैं। किसी भी प्रकार की फसलों, सब्जी, और बागवानी सब में सफल, सार्थक तथा लाभकारी है और गुणकारी भी है, चाहे वह खरीफ हो, रवी हो, या बागवानी हो। कोई भी रासायनिक खाद व दावा है चाहे वह फफूंदनाशी, कीटनाशी, कवकनाशी हो इनके बगैर होम्यो कृषि अपनाकर जैविक पदार्थों के सहारे और उनके मानक अनुरूप जैविक खेती के आयामों को बढाकर भरपूर पैदावार के साथ-साथ आर्थिक बचत भी कर सकते है और जैविक खेती के सपनो को साकार कर सकते है-होम्यो कृषि के सहारे। इसमें पूरा जैविक चक्र भी पूरा हो रहा है उदाहरण यदि मानव जाती को शुद्ध अन्न और फल चाहिए साथ ही पशुओ का आहार भी शुद्ध होना चाहिए उनके लिए रोग बिमारी के लिए दवाएं भी जैविक मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, पशु इससे उत्पादित चारा भूसा खा रहे हैं और उनके अन्दर लगने वाली बीमारियों के लिए इस मिशन ने होम्यो दवा भी तैयार की है। मानव आहार अन्न, शाक, सब्जी, फल, दूध, दही, घी भी पूर्ण जैविक है और शुद्ध हो रहा है। पशु आहार भी शुद्ध हो रहा है जिससे जैव पदार्थ गोबर, मूत्र भी शुद्ध हो रहा है तथा इस माध्यम से जमीन के अन्दर हमारे जो कृषि मित्र जीवाणु है उनका भी संवर्धन हो रहा है। इससे मानव जीवन, पशु जीवन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं हो रहा है, मृदा सुरछित हो रही है, पर्यावरण पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं है इससे कृषक बंधुओं की आर्थिक बचत हो रही है, उत्पादन भी बराबर मिल रहा है और और जैव पदार्थ व हरी खादों का सहारा लेकर उत्पादन बढाए भी जा सकते है। यदि हम यज्ञ, हवन की बात करते है तो आज की स्थिति में वातावरण में इसका वैज्ञानिक दृष्टि से सकारात्मक प्रभाव नहीं है। कारण की इसमें प्रयुक्त होने वाली हवन सामग्री चावल, जौ, तिल, गुड, घी भी प्रदूषित हैं। परन्तु होम्यो कृषि अपनाने से हवन सामग्री भी शुद्ध हो रही है। यदि हम योग की बात करते है तो आज की स्थिति में उग्र प्राणायाम भी घातक है और मानव जाती के साथ खिलवाड़ करना है। क्योंकि हमारे वातावरण में कही न कही से कीटनाशी, फफूंदनाशी एवं कवकनाशी रसायनों के द्वारा पूरा वातावरण विषाक्त हो गया है। परन्तु होम्यो कृषि में प्रयुक्त होने वाले मिश्रण में कोई भी ऐसे पदार्थ मिश्रित नहीं है जिसका दुष्प्रभाव वातावरण पर पड़ता हो, बल्कि होम्यो के सारे मिश्रण पर्यावरण शोधक एवं मित्र हैं। इससे उत्पादित खाद्यान्नों और आहार के द्वारा मानव के पाचन तंत्र व चर्मरोगों पर सकारात्मक प्रभाव पाया गया है एवं स्नायुविक विकारों पर नियंत्रण की पूरी संभावना है। यदि सारे समस्याओं का समाधान होम्यो कृषि से हो रहा है, तो इसे क्यों न अपनाया जाय?

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद् ने ऑर्गेनिक होम्यो उर्वरकों एवं दवाओं का परीक्षण उत्तर प्रदेश के चार कृषि विश्वविध्यालय के माध्यम से परीक्षण एवं प्रदर्शन विभिन्न प्रकार के फसलों एवं पशुधन पर प्रायोजित कराया है। चारो विश्वविध्यालय के वैज्ञानिक ने भी विशेष अभिरूचि से ऑर्गेनिक होम्यो उत्पादों को अंगीकृत किया है।

क्योंकि ऑर्गेनिक होम्यो उत्पाद से उपचारित फसलों एवं पशुधन पर आश्चर्यजनक रूप से सकारात्मक और चमत्कारी परिणाम सामने आये हैं। जिन्हें अपने समाचार संदेशों में वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा प्रकाशित किया गया है।

साथ ही जनवरी 28-30-2008 को C. S. Azad University of Agriculture and Technology Kanpur द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार में मेडिसिनल और आरोमेटिक प्लांट के लिए वैज्ञानिकों द्वारा संस्तुति भी दे दी गयी है।

उत्तरांचल सरकार द्वारा भी ऑर्गेनिक Input के लिए पारित कर दिया है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं पंजाब सरकार के निदेशालय ने भी विभिन्न टी० डी० एस० सेंटरों पर परिक्षण एवं प्रदर्शन प्रायोजित कराये हैं। जिसके परिणाम सार्थक एवं उत्तम आये हैं। रास्ट्रीय जैविक खेती केंद्र गाजियाबाद ने भी अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सम्मिलित किया है एवं अपने समाचार संदेशों में भी प्रकाशित किया है। रास्ट्रीय एवं प्रांतीय समाचार पत्रों, विभिन्न न्यूज़ चैनलों में भी इसको अनेकों बार प्रमुखता से प्रकाशित एवं प्रसारित किया है।

अनुरोध :

वैश्विक किसान भाइयों आप अपनी सहयोगात्मक आहूति देकर होम्यो कृषि पद्धति अपनाकर इस विश्व यज्ञ का लाभ उठायें।

शुभकामना !

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