बागवानी में होम्यो पद्धति का प्रयोग

अमृत + का प्रयोग विधि - 500 एम० एल० अमृत +, 200 ली० पानी, 1 कि० ग्रा० गुड़, दो कुंटल कम्पोस्ट, बर्मी कम्पोस्ट के साथ घोल तैयार कर जड़ों में चरों तरफ डालकर पुनः मिटटी से ढक दें। मिश्रण प्रयोग से पहले अपने सुविधानुसार भरपूर कम्पोस्ट प्रयोग कर सकते हैं और भी लाभकारी होगा।

सावधानी -

(1) मिश्रण प्रयोग से पहले 1 से 2 फुट चरों तरफ से मिटटी हटा लें, पौध के उम्र और विकास के ऊपर निर्भर करेगा।
(2) मिश्रण तैयार कर खुला न छोड़ें ढककर रखें।
(3) पौधों को पूरे वर्ष में प्रत्येक 3 या 4 महीने के अंतराल पर अमृत + का प्रयोग करना चाहिए। प्रत्येक पौधे में 5 लीटर घोल की आवश्यकता पड़ती है, पौधे के विकास के ऊपर निर्भर करेगा।
(4) कम्पोस्ट ताजा नहीं होना चाहिए।

संजीवनी - बागवानी में संजीवनी का प्रयोग वर्ष में दो बार अवश्य करना चाहिए, मुख्य रूप से बौर या फूल आने से 15 दिन पहले।

प्रयोग विधि - 500 एम० एल० संजीवनी 250-300 लीटर पानी 4 कि० ग्रा० गुड़ के साथ मिश्रण तैयार कर पौधों के ऊपर स्प्रे करना चाहिए तैयार मिश्रण में जितने पौधों की पूर्ती संभव हो करना चाहिए, पौधों के विकास के ऊपर निर्भर करेगा।

सावधानी - मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनायें यदि बर्तन बड़ा न हो तो छोटे स्टील के बर्तन में 4 कि० ग्रा० गुड़, पानी और संजीवनी का घोल तैयार कर स्प्रेयर में बराबर मात्रा डालकर पानी को पुनः मिलाएं। मिश्रण को खुला न छोड़ें, मौसम भी देख लेना चाहिए। सायंकाल का समय उचित है, बारिस की संभावना न हो, पानी और यन्त्र साफ़ सुथरा होना चाहिए।

सुधा + - बागवानी वाले पौधों में सुधा + का 3-4 बार प्रयोग होना चाहिए। पहला बौर के समय, दूसरा फल आने पर, तीसरा फल एक महीने का होने पर, चौथा स्प्रे उस स्थिति में होने चाहिए जब लम्बे अवधी वाले फल हो।

प्रयोग विधि - 500 एम० एल० सुधा +, 250-300 लीटर पानी, 4 कि० ग्रा० गुड़ के साथ मिश्रण तैयार कर पौधे के ऊपर स्प्रे करना चाहिए। तैयार मिश्रण में जितने पौधों की पूर्ती संभव हो करना चाहिए। पौधों के विकास के ऊपर निर्भर करेगा।

सावधानी - मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनायें यदि बर्तन बड़ा न हो तो छोटे स्टील के बर्तन में 4 कि० ग्रा० गुड़, पानी और सुधा + का घोल तैयार कर स्प्रेयर में बराबर मात्रा डालकर पानी को पुनः मिलाएं। मिश्रण को खुला न छोड़ें, मौसम भी देख लेना चाहिए। सायंकाल का समय उचित है, बारिस की संभावना न हो, पानी और यन्त्र साफ़ सुथरा होना चाहिए।

मोक्षा - बागवानी वाले पौधों में कहीं भी किसी भी प्रकार के कीट, फल भेदक, मच्छर, भुनगा आदि के बचाव हेतु प्रयोग करना चाहिए। जड़ के अन्दर यदि दीमक या किसी कीट का प्रकोप हो तो भी इसी का प्रयोग होना चाहिए।

प्रयोग विधि - 500 एम० एल० सुधा +, 240-280 लीटर पानी में मिश्रण तैयार कर या सीधे स्प्रेयर में बराबर मात्रा में डालकर प्रयोग कर सकते हैं। तैयार मिश्रण में जितने पौधों के ऊपर स्प्रे संभव हो करना चाहिए, पौधों के विकास के ऊपर निर्भर करेगा।

सावधानी -

(1) इसके साथ गुड़ का प्रयोग वर्जित है। पानी और यन्त्र साफ़ - सुथरा होना चाहिए, मिश्रण या तैयार मिश्रण खुला न छोड़ें, मिश्रण वाला बर्तन स्टील का ही होना चाहिए।
(2) जड़ों में दीमक व अन्य कीटों हेतु मिटटी हटाकर रेत के साथ मिश्रण तैयार कर चरों तरफ फैला दें और पुनः मिटटी से ढक दें, चार घंटे के बाद ऊपर से सिंचाई कर दें।