होम्यो कृषि क्यों?

क्योंकि -


(1) इससे उपचारित आलू में सालोसाल सिकुडन नहीं आती, सडन न के बराबर होता है। भण्डारण और ढुलाई में व्यय राशि की भी बचत होती है। पकने में अत्यंत सुविधाजनक और स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है।

(2) इससे उपचारित फसलों की परिपक्वता अवधी 10 से 15 दिन पहले होती है। दोनों में एकरूपता सुडौल और चमक अच्छी होती है। भण्डारण के दृष्टिकोण से सकारात्मक परिणाम पाया गया है।

(3) इससे उपचारित सब्जियों में फल रासायनिक खादों एवं दवाओं की अपेक्षा 10 दिन पहले निकलने शुरू हो जाते हैं। जिससे किसानों को बाजार भाव अच्छा प्राप्त होता है। भण्डारण के दृष्टिकोण से अच्छे परिणाम मिले हैं। गुणवत्ता और स्वाद में बढ़ोतरी मिली है और होती भी है।

(4) फसल के दानों में पटपर नहीं होता।

(5) विपरीत मौसम में फसल रासायनिक उर्वरकों की अपेक्षा कम से कम प्रभावित होती है या नहीं होती है।

(6) रासायनिक उर्वरकों या दवाओं की अपेक्षा होम्यो कृषि में लागत आधी आती है, व्यावहारिक दृष्टिकोण से या सरकारी संस्तुति के आधार पर कम आती है।

(7) रासायनिक उर्वरकों सब्सिडी के नाम पर उपव्यय राशि की बचत हो रही है। जो राष्ट्र के प्रगति का सूचक है।

(8) उसर भूमि में भी पैदावार देती है और उसर भूमि को भी सुधारती है।

(9) मानव स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अच्छा तो है ही उससे उत्पादित चारा भूसा खिलाने से पशुओं में दूध, दही की गुणवत्ता में अंतर पाया गया है।

(10) धान गेहूं में होम्यों उर्वरकों के प्रयोग से कोई रोग नहीं आता जिससे रासायनिक दवाओं पर होने वाले अपव्यय राशि की अतिरिक्त बचत होती है।

(11) इसका प्रयोग करते समय मानव जीवन पर किसी प्रकार दुष्प्रभाव नहीं है। साथ ही यह पर्यावरण मित्र भी है।

मुख्य सुझाव -

(1) रासायनिक उर्वरकों की अपेक्षा होम्यो उर्वरकों वाली फसल की लम्बाई प्रजाति के हिसाब से थोड़ी कम होगी।

(2) हरियाली प्राकृतिक रूप से होगी यानी रासायनिक उर्वरकों जैसी नहीं होगी।

(3) वानस्पतिक पत्तियों की संख्या कम होगी।

(4) होम्यो उर्वरकों वाली फसल कुछ अलग दिखेगी। अतः आप कृषको से अनुरोध है कि इन बिन्दुओं को देखते हुवे निराश न हों।

(5) उपभोक्ता सील पैक अवश्य देख लें।

(6) किसान बंधू निर्धारित लिखित मूल्य का ही भुगतान करें।