होम्यो कृषि कब, कैसे और क्यों ?

होम्यो उर्वरकों एवं दवाओं का एक परिचय-

(1) होम्यो अमृत -

यह डी० ए० पी० का विकल्प है। इसके प्रयोग से डी० ए० पी० और पोटास की मात्र नहीं देनी पड़ती है।
मात्रा - गेहूं और धान एवं दलहन की खेती में 2 ली० प्रति हे० तथा गन्ने और आलू में 8 ली० प्रति हे० देना पड़ता है।

प्रयोग विधि - गेहूं एवं मूंग, उर्द, मटर, चना में - प्रति हे० बीज को 2 ली० अमृत 4 कि० ग्रा० गुड़ के गाढे घोल में मिश्रित करके बीज लेपन अच्छी तरह से कर देना चाहिए एवं 4 कुंटल गोबर की खाद में पुनः मिश्रित कर अंतिम जुताई के समय बिखेर देना चाहिए तत्पश्चात पाटा लगाकर ढक देना चाहिए।
सावधानी - गुड़ में कम से कम पानी की मात्रा का प्रयोग करें ताकि दवा मिलाने के बाद गुड़ व दवा मिश्रति घोल जैसे गाढा हो जाये ताकि बीज लेपन अच्छा हो। सिड्रिल से बुवाई करने वाले किसान को गोबर की खाद की पूरी मात्रा पहले ही जुताई करते समय मिला दें। सिड्रिल में बुवाई करने के लिए लेपन किये हुवे बीज को आवास्यक्तानुसार बालू (रेत) के साथ पुनः हाथ से मिला दें ताकि सिड्रिल में चिपकाव न हो। रेत मिश्रित करने के बाद आसानी से सिड्रिल से बुवाई कर सकते हैं। दूसरी बात यह है की लेपित बीज को खुला न छोड़ें किसी प्लास्टिक से ऊपर से ढक दें ताकि दवा गैस बनकर उड़ने न पाए। अपने इच्छानुसार अधिक से अधिक गोबर की खाद प्रयोग कर सकते हैं। गेहूं में 40 कु०/हे० कम्पोस्ट होना ही चाहिए। दलहनी फसल में 10 कु०/हे० की मात्रा डालने से काम चल जायेगा।
धान - धान की खेती करने के लिए बीज को अमृत के साथ शोधन कर लें शोधन के लिए 125 एम० एल० अमृत से प्रति हे० बीज को शोधित किया जा सकता है। किसी स्टील के बर्तन में बीज पानी और दावा को एक साथ रखकर कम से कम 4 घंटे बर्तन में रहने दें। बर्तन को खुला न छोड़ें ढक दें किसी बर्तन से। जूट का बोरा प्रयोग न करें ढकने के लिए। उसके बाद नर्सरी दाल दें। आवश्यकता पड़ने पर संजीवनी व सुधा का प्रयोग करें। नर्सरी के खेत में अमृत का भी प्रयोग कर सकते हैं। बीज शोधित पानी को बेकार न फेंकें नर्सरी वाले खेत में दाल दें।
प्रयोग विधि - रोपाई के समय 2 ली० अमृत 4 कि०ग्रा० गुड़ के घोल में स्टील के बर्तन में मिश्रण तैयार कर 2 मिनट ढक दें। तत्पश्चात कम से कम 4 कुंटल गोबर की खाद में भली भाँती मिश्रित कर लें। पाटा लगाने से पहले पूरे खेत में घुर्काव कर पाटा लगावें। उसके बाद पौध रोपण करें। यदि खेत में जल भराव जादा हो तो उस स्थिति में अमृत की रोपाई के 10 - 15 वें दिन पर जड़ पकड़ लेने पर उपरोक्त विधिनुसार अमृत मिश्रित गोबर खाद को सायंकाल भुरकाव कर दुसरे दिन हलकी सिंचाई कर देनी चाहिए। पौध रोपण के लिए खेत में पानी इतना ही हो की पलेवा करने के बाद कीचड जैसी स्थिति हो।
नोट - रोपाई वाले खेत में ढैचा आदि हरी खादों का प्रयोग अवस्य करें। ऐसा करने से उत्पादन वर्तमान से अच्छा मिलेगा।

होम्यो अमृत -

गन्ने और आलू में -
प्रयोग विधि - आलू के बीज को अमृत के साहत शोधित करें और छाये में सुखा दें बुवाई करते समय प्रति हे० अमृत की मात्रा 4 कि० ग्र० गुड़ के घोले में स्टील वाले बर्तन में मिश्रित कर गोबर के खाद के साथ मिश्रण तैयार करें। प्रत्येक पंक्तियों में बराबर मात्रा में डालते जायें और बीज को भी साथ ही साथ रखते जाये और ढकते भी जाये जहां सिंचित क्षेत्र हो प्रति हे० अमृत की आधी मात्रा बुवाई के समय दें और आधी मात्रा पहली सिंचाई के समय पंक्तियों में भुरकाव कर फिर सिंचाई करें।
गन्ने में - प्रति हेक्टेयर बीज को 500 एम० एल० अमृत के साथ शोधित कर लें शोधन के लिए 500 एम० एल० अमृत को किसी बड़े एवं चौड़े स्टील के बर्तन में पानी भर लें अमृत को एक किलोग्राम गुड़ के साथ उसी पानी में मिश्रित कर लें और गन्ने के बीज को डालकर दो मिनट तक डुबाये रहें। इस तरह से शोधित कर लें। बुवाई के लिए आलू की भाँती प्रयोग करें।
सावधानी - गोबर की भरपूर मात्रा डालकर खेत की तैयारी करें। बुवाई के साथ प्रयोग वाले गोबर की खाद ताज़े नहीं होने चाहिए और अमृत मिश्रित गोबर की खाद खुला न छोड़ें, ढक कर रखें, निकालते समय किसी एक जगह से निकालें। प्रयोग हेतु फिर ढक दें ताकि उसकी गैस बहार न निकलने पाए। 20 टन हेक्टेयर की दर से कम्पोस्ट अनिवार्य होगा। ऐसा करने से गन्ने और आलू की उत्तम पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

टमाटर, बैंगन, मिर्च पपीते आदि में -
मात्रा - 4 ली० व 2 ली० प्रति हे० - फसल और पौध प्रजाति के ऊपर कम या अधिक मात्रा निर्भर करेगी।
प्रयोग विधि - उपरोक्त अनुसार अमृत, गुड़, गोबर का मिश्रण तैयार करें। उपरोक्त सावधाने के अनुसार जड़ में बराबर मात्रा में डालक मिटटी से ढक दें। (थाला बनाकर) 12 घंटे के अन्दर सिंचाई कर दें जहां असिंचित क्षेत्र है वहाँ अमृत मिश्रित गोबर की खाद को पानी में गढ़ा घोलकर तैयार कर स्टील के गिलास से जड़ के अन्दर मिटटी हटाकर डालते जाये तत्पश्चात मिटटी से जड़ को ढकते जाये।
होम्यो संजीवनी - यह दवा रासायनिक खाद यूरिया का विकल्प है।
मात्रा - 500 एम० एल० / हे० प्रत्येक फसल पर।
प्रयोग विधि - धान और गेहूं की फसल में किल्ले निकलने की प्रारंभिक अवस्था में (22 से 25 दिन के अन्दर) 500 एम० एल० संजीवनी 4 कि० ग्रा० और 250 से 300 लीटर पानी के साथ स्प्रे कर दें। दूसरा छिडकाव गर्भावस्था में (60 से 65 दिन के अन्दर में) समान विधि अनुसार स्प्रे कर दें। दूसरी विधि भुरकाव में ऐसा करें - 500 एम० एल० संजीवनी 4 कि० ग्रा० गुड़ और अवास्यक्तानुसार पानी स्टील के बर्तन में मिश्रण तैयार करें और प्रति हेक्टेयर 4 कुंटल गोबर की खाद में पुनः मिश्रित करके शाम को सूर्यास्त से पहले खेत में भुरकाव कर दें। दुसरे दिन सिंचाई अवस्य कर दें इसी विधि से गर्भावस्था के समय प्रयोग करें। आलू में मिटटी चढाने से पूर्व स्प्रे या भुरकाव कर मिटटी चढ़ा देने चाहिए। चारे वाली फल्सों में प्रत्येक कटिंग के बाद उपयुक्त होता है।
सावधानी - छिड़काव हेतु मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनाये बर्तन खुला न छोड़ें मिश्रण निकालते समय पुनः ढक दिया करें। भुरकाव वाले मिश्रण को भी ढक कर ही रखें ताकि गैस बहार न निकले। साथ भुरकाव के समय ध्यान रखें की जितनी क्षेत्रफल की सिंचाई कर सकते हैं उतने में भुरकाव करें। विशेष परिस्थितियों में सिंचाई के बाद भुरकाव कर सकते हैं। परन्तु खेत में हल्का पानी लगा हो यानि कीचड़ जैसी स्थिति हो और शाम को ही स्प्रे या भुरकाव करें। वैसे स्प्रे उत्तम विधि है स्प्रे लो बैलूम (कम फुहारक) में ही करें ताकि पौधे अच्छी तरह से भीग जायें।
होम्यो रक्षक - यह दवा आलू में रोग, बीमारियों और व्याधियों से बचाव करते हैं। जैसा अगेती झुलसा, पिछेती झुलसा आदि। सिकुडन नहीं आती, साथ ही गुणवत्ता उत्पन्न करती है।
मात्रा - 500 एम० एल० / हे०।
प्रयोग विधि - 250 से 300 ली० पानी में 4 कि० ग्रा० गुड़ और 500 एम० एल० रक्षक का मिश्रण तैयार कर लो बैल्युम (कम फुहारक) से स्प्रे कर दें 2-3 स्प्रे करना चाहिए प्रत्येक 10-15 दिन के अंतराल पर।
सावधानी - स्प्रे करते समय मौसम देख लेना चाहिए। पानी और यन्त्र साफ़ सुथरा होना चाहिए। सायंकाल में ही स्प्रे करें। मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनायें मिश्रण खुला न छोड़ें।
होम्यो सुधा - यह दवा धान, गेहूं में खैरा बीमारी झुलसा सडन आदि अनेक रोग और बिमारियों से रक्षा करती है। गुणवत्ता उत्पन्न करके प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करती है। यह रोग से मुक्ति भी दिलाती है।
मात्रा - 500 एम० एल० / हे०।
प्रयोग विधि - 250 से 300 ली० पानी में 4 कि० ग्रा० गुड़ और 500 एम० एल० सुधा का मिश्रण तैयार कर लो बैल्युम (कम फुहारक) से स्प्रे करें।
सावधानी - स्प्रे करते समय मौसम देख लेना चाहिए। पानी और यन्त्र साफ़ सुथरा होना चाहिए। सायंकाल में ही स्प्रे करें। मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनायें मिश्रण खुला न छोड़ें।
होम्यो सुधा + - आम, पपीता, नींबू आदि में इसके प्रयोग से बौर में सिकुडन, झडन, फल न लगने, फल में सडन, काले धब्बे पड़ने, पत्तियों का सिकुडन, डंठलों में विकृति, पत्तियों का पीला पड़ना आदि में प्रभावशाली है। साथ ही फलों कि गुणवत्ता भी बढती है और वजन में भी वृद्धि पाई गयी है।
मात्रा - 500 एम० एल० / हे० या पौधों के वानस्पतिक वृद्धि के अनुपात के अनुसार।
प्रयोग विधि - 250 से 300 ली० पानी में 4 कि० ग्रा० गुड़ और 500 एम० एल० इस दवा का मिश्रण तैयार कर के समय समय पे स्प्रे करें। रोग दिखाई देने पर यह सुरक्षा पहले भी कर सकते हैं। सामान्य तौर पर बौर आने पर पहला छिडकाव, दूसरा मटर के बराबर फल दिखाई देने पर, तीसरा फल एक महीने के होने पर प्रयोग करें। एक बार में ही पूरी मात्र प्रयोग कर सकते हैं या आधी मात्रा शाम को सुविधानुसार।
सावधानी - स्प्रे करते समय मौसम देख लेना चाहिए। पानी और यन्त्र साफ़ सुथरा होना चाहिए। सायंकाल में ही स्प्रे करें। मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनायें मिश्रण खुला न छोड़ें।
होम्यो जीवन - मिर्च, टमाटर, गोभी, भिन्डी, पालक, प्याज, मटर में पत्तियों में ऐंठन, सिकुडन, फूल गिरना, मुजैक (वायरस) सडन आदि में विशेष रूप से प्रभावशाली है। मिर्च, टमाटर के रामबाण औसधी है। मटर के उकठा रोग के लिए प्रभावकारी है। फलों कि संख्या वजन में 10-15 प्रतिशत कि वृद्धि होती है। गुणवत्ता भी उत्पन्न करती है।
मात्रा - 500 एम० एल० / हे०।
प्रयोग विधि - 250 से 300 ली० पानी में 4 कि० ग्रा० गुड़ और 500 एम० एल० इस दवा का मिश्रण तैयार करके लो बैल्युम (कम फुहारक) से स्प्रे करें आवश्यकतानुसार समय समय पर स्प्रे करें। सुरक्षा और गुणवत्ता के दृष्टिकोण से भी प्रयोग किया जा सकता है। सामान्य तौर पर प्रत्येक तुड़ाई के उपरान्त प्रयोग करने से अत्यधिक लाभकारी होता है।
सावधानी - स्प्रे करते समय मौसम देख लेना चाहिए। पानी और यन्त्र साफ़ सुथरा होना चाहिए। सायंकाल में ही स्प्रे करें। मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनायें मिश्रण खुला न छोड़ें।
होम्यो बरदान -लता वाली सब्जियों जैसे - निनुवा, तरोई, कद्दू, करेला, लोभिया, मूंग, उड़द, आदि में लूटरा सिकुडन, मुजैक (वायरस) सडन फूल का गिरना, फलों का न टिकना, पत्तियों का पीला पड़ना आदि में प्रभावकारी है। फलों कि संख्या वजन में 10-15 प्रतिशत कि वृद्धि होती है। गुणवत्ता भी उत्पन्न करती है।
मात्रा - 500 एम० एल० / हे०।
प्रयोग विधि - 250 से 300 ली० पानी में 4 कि० ग्रा० गुड़ और 500 एम० एल० बरदान का मिश्रण तैयार करके लो बैल्युम (कम फुहारक) से स्प्रे करें। आवश्यकतानुसार समय समय पर तथा गुणवत्ता और सुरक्षा कि दृष्टिकोण से भी रोग से मुक्ति दिलाती है। फलों कि संख्या और वजन में 10 प्रतिशत कि वृद्धि पाई गयी है। भण्डारण के हिसाब से 24 से 48 घंटे के उपरान्त भी गुणवत्ता व ताजगी बनी रहती है। सामान्य तौर पर फूल आने पर प्रथम छिडकाव, दूसरा फल लगने कि अवस्था में, प्रत्येक तोड़ाई के बाद स्प्रे करने से अत्यधिक लाभकारी होता है।
सावधानी - स्प्रे करते समय मौसम देख लेना चाहिए। पानी और यन्त्र साफ़ सुथरा होना चाहिए। सायंकाल में ही स्प्रे करें। मिश्रण स्टील के बर्तन में ही बनायें मिश्रण खुला न छोड़ें।
होम्यो मोक्षा - किसी भी कीटनाशी दवा कि अपेक्षा बिना किसी दुष्प्रभाव के अधिक लाभकारी है। जैसे बैंगन, टमाटर, करेला, भिन्डी, गन्ने, आम, सरसों, धान, मक्का में किसी प्रकार के मच्छर, माहू, भुनगा, पट्टी लपेटक, सुंडी, दीमक, ताना भेदक, फल छेदक आदि में लाभकारी है। साथ ही यह दवा नीलगाय से भी मुक्ति दिलाती है।
मात्रा - 500 एम० एल० / हे०, प्रजाति और वानस्पतिक वृद्धि के अनुसार कम क्षेत्रफल में भी।
प्रयोग विधि - 240 से 280 ली० पानी के साथ स्प्रे करें। लो बैल्युम (कम फुहारक) नीलगाय के लिए छोटे डंठलों में रूई लपेट कर 5 से 10 बूँद उस पर डाल दें और खेत के चरों तरफ थोड़ी-थोड़ी दूरी पर गाड़ दें और बीच बीच में भी प्रयोग करें। जमीन के अन्दर दीमक के लिए रेत में मिश्रित करके भुरकाव करें। दवा स्प्रेयर मशीन से सीधे डालें पानी भरने के बाद और सुको किसी डंठल से घोल दें।
विशेष सावधानी - मोक्षा के किसी भी फसल, फल, साग, सब्जी और बागवानी में प्रयोग करने हेतु किसी होम्यो दवाओं के प्रयोग के उपरान्त व पहले आवश्यकता एवं सुविधानुसार प्रयोग कर सकते हैं। परन्तु कम से कम 48 घंटे का अंतर होना चाहिए।

अमृत + - गन्ना, पपीता, मिर्च, बैगन, टमाटर, गोभी में अतिरिक्त पोषक तत्वों कि पूर्ती के लिए इसका प्रयोग आवश्यक होगा। इसका प्रयोग ड्रीचिंग विधि द्वारा उपयुक्त होगा।
मात्रा - एक लीटर प्रति हेक्टेयर अमृत + एक किलोग्राम गुड़ तथा 300 लीटर पानी।
प्रयोग विधि -
गन्ना - इस फसल में मुख्यतया 3 बार प्रयोग करना चाहिए। पहला ड्रीचिंग गन्ने कि 12 इंच की लम्बाई हो जाने पर दूसरी बार ड्रीचिंग पहले से 30 दिन के बाद तीसरी ड्रीचिंग जब गन्ने में गाठे पड़ने की अवस्था पर। इसमें संजीवनी का स्प्रे कर सकते हैं और ड्रीचिंग भी दोनों में 10 दिन का अंतर होना चाहिए। ध्यान देना है की पहले अमृत प्लस करें उसके बाद संजीवनी यदि इसमें सुधा का प्रयोग करना पड़े तो अमृत प्लस दुसरे दिन कर सकते हैं। सुधा का स्प्रे ही उत्तम होगा। सुधा के प्रयोग से झुलसा लालिमा रोग आदि बिमारियों के बचाव हेतु करना उचित होगा। कोई बीमारी आने से सुधा का ही प्रयोग होगा।
ड्रीचिंग के लिए प्रति हे० अमृत प्लस गुड और पानी बड़े स्टील के बर्तन में एक साथ घोल तैयार कर स्प्रेयर में भर लें तथा स्प्रेयर से नोजल निकालकर पम्पिंग कर क्यारियों के ऊपर जड़ के बगल में ड्रीचिंग करें यह किसी छोटे स्टील के बाल्टी में निकालकर स्टील के गिलास से जड़ के बगल में डालते हुवे आगे बढ़ते जाएँ। तैयार मिश्रण खुला न छोड़ें स्प्रेयर या बाल्टी में भरने के बाद पुनः ढक दिया करें इस तरह से अमृत प्लस का प्रयोग अधिक फसलों के उत्पादन में सहायक होगा।
पपीता - इस फसल में 40 टन प्रति हेक्टेयर कम्पोस्ट मिलकर खेत तैयार करना चाहिए। उसमें गड्ढा 1/2 मी० + 1/2 मी०, 1/2 मी० के हिसाब से लम्बा गहरा और चौड़ा बनाकर अमृत के मिश्रण के साथ तैयार गोबर की खाद को 50 किलोग्राम प्रति गड्ढे के हिसाब से भर देना चाहिए। कुछ ऊपर तक क्योंकि पौध रोपण के समय बराबर हो जाये। अमृत मिश्रित कम्पोस्ट को खुला न छोड़ें ढक दें या मोती परत मिटटी दाल दें। पपीता का एक महीना का पौध हो जाने पर अमृत प्लस का ड्रीचिंग करें प्रति पौध आधा लीटर के हिसाब से करना उचित होगा। इसमें संजीवनी का ड्रीचिंग एवं स्प्रे भी करना होगा जब भी संजीवनी का ड्रीचिंग व स्प्रे करना हो पहले अमृत प्लस फिर 15 दिन के अंतर पर संजीवनी करना चाहिए इस तरह प्रत्येक तीसरे महीना अमृत प्लस व संजीवनी का क्रम से प्रयोग होना चाहिए। सुधा प्लस में प्रत्येक तीसरे महीने में करना अनिवार्य होगा। सुधा प्लस अमृत प्लस से दुसरे दिन या उसी दिन स्प्रे कर सकते हैं। सुधा प्लस का स्प्रे ही होगा। संजीवनी एवं सुधा प्लस में 48 घंटे का अंतर होना चाहिए। सुधा प्लस का तीसरे महीने होना चाहिए प्रत्येक मौसम परिवर्तन पर। वर्षा से शरद ऋतु और शरद ऋतु से गर्मी आने पर तथा फूल आने के समय अवस्य होना चाहिए यानि सुधा प्लस फूल व फल के लिए भी उपयोगी है। इसके प्रयोग से फल में गुणवत्ता भी उत्पन्न होती है और पैदावार में वृद्धि पाई गयी है। अमृत प्लस को मुख्यतया अगस्त एवं फ़रवरी महीने में अवस्य करना चाहिए।
मिर्च टमाटर बैंगन, भिन्डी, गोभी में - अमृत + का प्रयोग ड्रीचिंग विधि से होना चाहिए। पहला ड्रीचिंग फूल आने से पहले दूसरा फल आने पर और तीसरी बार इन फसलों में 2 या 3 बार फल निकलने के उपरान्त, पौध के उम्र और विकास पर निर्भर करेगा। इन फसलों में जीवन का प्रयोग फूल आने पर अवस्य होना चाहिए फिर फल आने पर। यह मिश्रण सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से महीने में दो बार प्रयोग करना चाहिए। जिससे फल-फूल की मात्र गुणवत्तायुक्त उत्पादन और भण्डारण क्षमता में वृद्धि करक होते हैं। जीवन के संतुति के आधार पर। इन सबमे मोक्षा का प्रयोग किसी प्रकार के कीट मच्छर से बचाव हेतु मोक्षा संतुति के आधार पर होना चाहिए।

खीरा वर्गीय फसलों में जैसे तरबूज, खरबूज, लौकी, परवर, खीरा आदि में प्रयोग और मात्रा
खीरा वर्गीय जितने भी बीज हैं उनको बरदान से शोधन करना होगा। इसमें 20 टन प्रति हे० कम्पोस्ट का प्रयोग होना चाहिए। इमसे 2 लीटर प्रति हे० की मात्रा अमृत, 2 किलोग्राम गुड और कम्पोस्ट के साथ मिश्रित कर खेत में मिला देना चाहिए या क्यारियों और गड्ढे में बराबर मात्र में प्रयोग कर सकते हैं जिसके लिए 16 टन पहले ही खेत में मिला दें और 4 टन गड्ढे एवं क्यारियों में अमृत के साथ मिश्रण प्रयोग कर सकते हैं। पौध निकलने के बाद फूल आने से पहले एक बार अमृत प्लस का ड्रीचिंग विधि से प्रत्येक थालों में प्रयोग करना चाहिए उसके बाद दो या तीन बार प्रत्येक महीने के अंतर से करना चाहिए। यह फसल के ऊपर निर्भर करेगा। कम्पोस्ट की मात्रा भी फसल के अनुसार कम व जादा कर सकते हैं। करीब 12 इंच का पौध हो जाने पर संजीवनी का ड्रीचिंग विधि से प्रयोग करें। उसमे वरदान का प्रयोग फूल आने पर अवस्य करें। उसके बाद फल आने पर बरदान का प्रयोग करना होगा। बरदान महीने में दो बार प्रयोग अवश्य करना चाहिए। जिससे फल फूल गुणवत्ता युक्त उत्पादन और उसके भण्डारण क्षमता में वृद्धि करक होता है। मिक्ष का किसी भी प्रकार के कीट या मच्छर का प्रकोप होने पर बिना गुड के पर्णीय छिडकाव करें मोक्षा के संतुति के आधार पर। किसी भी दवा के दो दिन के अंतर पर प्रयोग होना चाहिए। जैसे बरदान के प्रयोग के बाद - मोक्षा - के प्रयोग के बाद बरदान का प्रयोग करें। जिसमे दो दिन का अंतर अवश्य ध्यान रखें। बरदान - बरदान के संतुति के आधार पर।

शकरकंदी फसलों में - लहसुन, प्याज में अमृत का प्रयोग -
इन फल्सों में 20 टन प्रति हे० की दर से कम्पोस्ट देना अनिवार्य होगा। अमृत का प्रयोग दोनों फल्सों में दो लीटर अमृत 4 किलोग्राम गुड 4 कुंटल कम्पोस्ट के साथ मिश्रण तैयार कर अंतिम जुताई पर फैला कर खेत में मिला देना चाहिए। उसके बाद पाटा से ढक देना अनिवार्य होगा। रोपाई से 35 दिन पर उपरोक्तानुसार पुनः क्यारियों में अमृत का मिश्रण फैला करके सिंचाई कर देना चाहिए। मिश्रण को शाम के समय भुरकाव करें और दुसरे दिन सुबह सिंचाई अवश्य करें। स्थितिवश ऐसा न हो तो इस मिश्रण को क्यारियों में डाल कर तुरंत सिंचाई करें। इसमें संजीवनी का प्रयोग पहले सिंचाई के बाद स्प्रे कर देना चाहिए। संजीवनी के संतुति के आधार पर।
                                                                                                                                                                                        लहसुन में गाँठ पड़ने के अवस्था में एक बार पुनः जीवन का स्प्रे होना चाहिए। जीवन के संतुति के आधार पर।
प्याज - इसमें संजीवनी गाँठ पड़ने की अवस्था में एक बार अवश्य करना चाहिए। संजीवनी के संतुति के आधार पर। आवश्यकता पड़ने पर दूसरी बार भी प्रयोग कर सकते हैं 20 दिन के अंतर से। इसमें जीवन का प्रयोग संजीवनी से 7 से 10 दिन के अंतर से पहला प्रयोग दूसरा 15 दिन के अंतर पर होना चाहिए। जीवन के संतुति के आधार पर।

चारे वाली फसल - बरसीम और लोबिया में 2 ली० प्रति हे० अमृत का प्रयोग गेहूं की भाँती संतुति के आधार पर होगा। जिसमे आधी मात्रा बीज लेपन के समय और आधी मात्र का प्रयोग 5 से 6 पत्तियां निकल आने पर गोबर के साथ गुड़ और शेष आधी मात्रा का मिश्रण तैयार कर शाम के समय भुरकाव कर देना चाहिए और सुबह हलकी सिंचाई कर देना चाहिए। उसके 10 से 15 दिन के बाद संजीवनी का प्रयोग होना चाहिए सनीवानी के संतुति के आधार पर। यदि रोग दिखाई दे तो सुधा का प्रयोग करना उत्तम होगा। सुधा के संतुति का आधार पर। किसी कीट के प्रकोप होने पर मोक्षा का प्रयोग होना चाहिए। मोक्षा के संतुति का आधार पर।


नोट -
1.      पपीते का बीज, सुधा + से मिर्च, टमाटर आदि के बीच जीवन से और खीरा वर्गीय फसलों के बीज बरदान से शोधित करना चाहिए।
शोधन विधि - 10 ग्राम बीज 10 एम० एल० दवा, 10 ग्राम गुड़ उसमे थोडा सा पानी के साथ बीज लेपन कर स्टील के बर्तन में रखकर 15 मिनट तक ढक देना चाहिए। उसके बाद स्टील के बर्तन में या पक्के फर्श पर छाया में सुखा लेने चाहिए। उसके बाद बीज रोपित करें।
2. दलहनी फसलों में अमृत + का भी प्रयोग हो सकता है। प्रयोग विधि अमृत जैसी ही होगी।